गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

शनिचरी अमावस्या पर बरसेगी विशेष किरपा

- राजकुमार सोनी
शनिवार के दिन शनि देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। 21 अप्रैल को शनिचरी अमावस्या है। श्यामवर्णी शनिदेव को काला रंग बहुत प्रिय है इसीलिए शनिदेव की कृपा पाने के लिए आज अमावस्या के अंधकार में शनि देव का ध्यान किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार- यह संपूर्ण ब्रह्मांड 360 डिग्री में विभक्त है। जिसे 12 राशियों में विभक्त करने पर 30 डिग्री की एक राशि होती है। सूर्य की परिक्रमा करने वाले नौ ग्रहों में शनि भी एक ग्रह है। जिसे सबसे धीमी गति के ग्रह के नाम से जाना जाता है क्योंकि इस ग्रह को 30 डिग्री की एक राशि को पार करने में लगभग ढ़ाई वर्ष का समय लगता है। क्या कहता है ज्योतिष : ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु राजौरिया के अनुसार- यह अमावस्या कर्क, सिंह और कन्या राशि वाले जातकों के लिए कष्टकारी है। सबसे अधिक प्रभाव सिंह राशि वाले जातकों पर पड़ेगा। अत: उन्हें आज के दिन शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। 15 नवंबर 2011 से शनि राशि बदलकर कन्या से तुला में आ गया था। इस वजह से सभी कन्या, तुला एवं वृश्चिक राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती एवं कर्क तथा मीन राशि वालों को ढैय्या का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी लोगों को शनिश्चरी अमावस पर शनि के निमित्त दान-पुण्य और काल सर्प दोष, पित्र दोष, ग्रहण दोष एवं चाण्डाल दोष आदिकी पूजा अवश्य करनी चाहिए। शनि की पूर्ण दृष्टि धनु एवं कर्क राशि पर पडऩे से अशांति, बीमारी, मानसिक तनाव एवं सामाजिक परेशानियां से इस राशि वाले भी प्रभावित हो रहे हैं। शनिवार को आने वाली शनिश्चरी अमावस्या के दिन शनि दोष से प्रभावित व्यक्ति , काल सर्प दोष, पित्र दोष, ग्रहण दोष एवं चाण्डाल दोष से प्रभावित लोग इस अमावस्या पर पूजन एवं दान कर परेशानियों से राहत प्राप्त कर सकते हैं। क्या करें : शनिचरी अमावस्या के दिन दान-पुण्य, स्नान आदि का विशेष महत्व है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए कुछ लोग मंदिरों के बाहर अपने चप्पल व कपड़े छोड़कर चले जाते है। आज के दिन हमें जरूरतमंदों को वस्त्र, फल, अनाज आदि का दान करना चाहिए तथा विपदानाश के लिए ओम शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। पवित्र नदी के जल में स्नान कर शनि देव को तेल, लौहा व काले तिल अर्पित करना चाहिए। मोक्षदायिनी उज्जैयिनी एक ऐसी नगरी है जहाँ हरसिद्धी देवी, काल भैरव और महाकाली तीनों ही विराजीत है। अत: शनिवार के दिन पुण्यसलिला क्षिप्रा में स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। कोई ग्रह खराब या बुरा नहीं होता। शनि के बारे में हमारे मन में कई भ्रामक धारणाएँ है। शनि भी फलदायक ग्रह है। आज शनिचरी अमावस्या के दिन शनि की उपासना करके हम शनि के कृपा पात्र बन सकते हैं। राशियों पर प्रभाव मेष : अच्छा समय, चिंता का निवारण होगा, पद-प्रतिष्ठा और घर-वाहन सुख के लिए अच्छा है। वृषभ : शुक्र के कारण कला के कार्य में सफलता व प्रतिष्ठा मिलेगी। संतान की चिंता का निवारण होगा। खान-पान का ध्यान रखें। मिथुन : समय बहुत पक्ष का नहीं है। आलस, निराशा और कटु वाणी से बचें। माँ के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कर्क : समय पक्ष का है। तनाव कम होगा। अटके काम बनेंगे। गुरु का आशीर्वाद और स्त्री पक्ष से लाभ होगा। सिंह : स्वास्थ्य का पाया कमजोर रह सकता है। जिन्हें शुगर या कफ की शिकायत हैं वे परहेज करें। बाकी समय ठीक है। कन्या : मन का असमंजस दूर होगा। काम में मन लगेगा। कला या लेखन से आय होगी। तुला : भावावेश में निर्णय न लें। अधिक जोश व रिस्क लेने का समय नहीं है। शान्ति और संयम से कार्य करते रहें। वृश्चिक : शुक्र और शनि कलाकारों को निश्चित ही लाभ देने वाले हैं। मेहनत जारी रखें। निर्णय शान्ति से लें। गुरु की सेवा करें। धनु : कफ व साँस के रोगी सावधानी रखें। शेष के लिए अच्छा समय है। चिंता दूर होगी, अटके काम बनते जाएँगे। मकर : नए परिचय लाभ देंगे। पुरानी मेहनत या निवेश का फायदा मिलेगा। जल्दबाजी न करें। माता-पिता का अनादर न करें। कुंभ :थोड़ा सावधान रहना होगा। शत्रु सक्रिय होंगे। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर रह सकता है। परहेज करें व कागज-पत्रों के व्यवहार में चुस्त रहें। मीन : मन में असमंजस और तनाव रह सकता है। अपने निर्णयों पर शंका रहेगी। अत: गुरु या बड़ों की सलाह अवश्य लें। कार्य सिद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा। विशेष : अगर आप कई वर्षों से जटिल समस्याओं से घिर हैं और तत्काल निदान चाहते हैं तो संपर्क करें : panditraj259@gmail.com

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें