मंगलवार, 6 अगस्त 2013

जिन्दगी की कहानी , भविष्यवेत्ताओं की जुबानी



मानव मन बड़ा जिज्ञासु है। भविष्य में उसका क्या होने वाला है? कल की बात आज जान लेने के लिए वह आतुर रहा है - अनादिकाल से।  ज्योतिष शास्त्र का विकास अपनी इसी मनोवैज्ञानिक अवधारणा को पूर्ण करने के उद्देश्य से पल्लवित और पुष्पित होता आ रहा है।  तथाकथित कट्टर से कट्टर कर्मवादी के मन में भी अपने भविष्य को जानने की प्रबल जिज्ञासा बनी रहती है।  मैरी लेनोर्मा को भविष्यदृष्टाओं की सम्राज्ञी कहा जाता है। वह हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, नक्षत्र विज्ञान और ताश के पत्तों से भाग्य व भविष्य बताया करती। एक ऐसे दौर में उसने नाम कमाया, जब भविष्यवाणी करना राजद्रोह के समान था, मगर वह कभी नहीं घबरायी, न विरोध से और न वक्त से। उसने एक अखबार (Sourenirs Prophetiques) निकलना शुरू किया, जो ज्योतिष और भविष्यवाणियों के बारे में था। आइये जानते हैं आज की आवरण कथा में।



ब्रेहन का संत: कैनेथ मैकेंजी
पुराने अधिकांश ज्योतिषियों की भविष्यवाणी प्राय: पहेलीनुमा उलझी भाषा में हैं। ब्रेहन के संत की भविष्यवाणियों की सबसे बड़ी विशेषता है कि वे व्यक्तियों, परिवारों राजघरानों, शहरों, नदियों और अविष्कारों के बारे में इतनी सरल और स्पष्ट भाषा में सब कुछ बताती हैं कि दिमाग पर जोर नहीं डालना पड़ता। उसने जो कुछ भी कहा, एक दम सही निकला। आईए! देखें उनकी कुछ भविष्यवाणियॉ :-
1. ''दुर्गम पहाड़ों की ऊंची चढ़ाईयां एकदम आसान हो जायेंगी। पूरा रास्ता रिबन जैसा होगा और मशीन से चलने वाली बग्घियां उन घाटियों से होकर गुजरेगी, जिनके किनारे धातु के पुलों द्वारा जोड़े जायेंगे।''
2. ''घरों तक पहुंचेगा पीने का पानी और खाना बनाने की बहती हुई आग।''
3. ''आपस में जुड़ी बग्घियों की डोर लोहे की पटरी पर एक जगह से दूसरी जगह को लायें-ले जायेंगी। उसे जानवर नहीं इंसानों का दिमाग चलायेगा।''
4. ''महासागरों के नीचे भी, गहराई में चलेंगे पोत, जिनके आग के तीर दुश्मन पर हमला करेंगे।''
ऐसी स्पष्ट भविष्यवाणियां करनेवाला भविष्यवक्ता था, कैनेथ मैकेंजी। जिसे कोइन्नाक फियोसाइके या ब्रेहन के संत के नामों से याद किया जाता है। वह 16वीं शताब्दी के अन्त में और 17वीं शताब्दी के शुरू में पैदा हुआ था। स्कॉटलैण्ड की पहाडिय़ों में आमतौर पर सभी नागरिकों में अल्पविकसित भाविष्यदृष्टा छिपा होता है। ऐसा मानने के कई कारण और प्रमाण हैं। प्रसिद्ध लेखक सर वाल्टर स्कॉट ने ऐसे अनेक लेख लिखे हैं, जिनमें साबित होता है कि स्कॉट लोगों में छठी इन्द्रिय (Sixth Sense) स्वाभाविक रूप से अधिक जागृत होती है।  ब्रेहन के संत के पास एक रहस्यमय पत्थर/नीले रंग के इस माणिक में वह भविष्य देखता था। उसके पास यह पत्थर या रत्न कैसे आया इसे लेकर स्कॉटलैण्ड में कई कथाएं प्रचलित हैं। इस भविष्यवक्ता ने प्रारम्भ में अपनी आमदनी के जरिए के रूप में भविष्यवाणियां करनी शुरू कीं। उसकी गणनाएं इतनी सही होती थी और अनुमान इतने अचूक होते थे कि धीरे-धीरे उसकी ख्याति चारों ओर फैल गई। जल्दी ही लोगों ने उसे कैनेथ मैकेंजी के बजाय ब्रेहन का सिद्ध या दृष्टा कहना शुरू कर दिया। उसकी भविष्यवाणियों में कैलेडॉनियन नहर के निर्माण के 150 साल पहले की गई भविष्यवाणी उक्ति बहुत मशहूर है। ''पोत चलेंगे टाम्नाहारिक पहाड़ी के पीछे, पूर्व से पश्चिम और पश्चिम से पूर्व में।'' ब्रिटेन में आजकल फैशन का जो रूप है, उसके बारे में बे्रहन दृष्टा का कहना था, ''देश की उन्नति होगी, मगर युवा बिगड़ेंगे और इतने जनाना छाप (Effeminate) हो जायेंगे कि उनमें साहस भी नहीं रह जायेगा। भेड़ों का झुण्ड भी उन्हें डराने के लिए काफी होगा।'' एक मामले में तो ब्रेहन दृष्टा ने ऐसी भविष्यवाणी की, जिससे लगता था कि वह बहुत पहुंचा हुआ सिद्ध पुरूष भी है। लोकाल्श के मैकेंजी ने उसके साथ दुव्र्यवहार किया तो वह बोला ''तेरी सारी जायदाद नष्ट हो जायेगी और काफी समय बाद तेरी आने वाली पीढिय़ों में मैथीसंस उसके मालिक बनेंगे।'' 128 साल बाद ऐसा ही हुआ। अलैक्जेंडर मैथीसन इस जायदाद का आखिरी वारिस बना। एक भविष्यवाणी में बे्रहन भविष्यदृष्टा ने आणविक पनडुब्बी की कल्पना की है - ''होली लॉच के पास बिना सींग और पांव की गाय जैसी चारों ओर से बन्द नावें होंगी। समुद्र से आग के तीर छोडऩे की ताकत रखने वाली नौकाओं से ऐसी किरणें निकलेंगी, जो मौत लायेगी। आज होली लॉच नामक स्थान के पास पनडुब्बियों का अड्डा है।  ब्रेहन के संत का सबसे अनोखा कारनामा खुद उसी के लिए घातक बन गया। उसने सीफोर्थ के अर्ल के पेरिस प्रवास के दौरान उसकी पत्नी इसाबेला की फरमाइश पर अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर जो बताया वह कुछ इस प्रकार था - ''उसके वापिस न लौटने का कारण है एक खूबसूरत औरत। अपने घुटनों के बल उसके सामने बैठा अर्ल कैनेथ उसका हाथ चूमकर प्रेम की भीख मांग रहा है।''  ब्रेहन-दृष्टा की इस अद्भुत क्षमता को देखकर खुद काले कारनामों में लिप्त इसाबेला को डर सताने लगा कि कहीं यह संत उसके पति को उसके जीवन के बारे में न बता दे।  इसाबेला के जाते ही तमाम लोगों के सामने ब्रेहन-दृष्टा ने कहा ''मुझे मिटाने वालों का पूरा वंश समाप्त हो जायेगा। उसके वंश का आखिरी चिराग गूंगा-बहरा होगा और उसके चार बेटेे होंगे जो उसी के सामने मर जायेंगे। फिर इस वंश से कोई व्यक्ति ब्रेहन पर राज नहीं करेगा। सारी सम्पत्ति और भूमि एक अजनबी के हाथों चली जायेगी।'' जासूसों से जब इसाबेला को इस भविष्यवाणी का पता चला तो वह गुस्से से पगला गई। उसने हुक्म दिया कि कोइन्नाक ब्रेहन दृष्टा को शैनोरी प्वांइट पर ले जाकर सबके सामने जला दिया जाए।  जब कोइन्नाक को रस्सियों से बांधकर जलाने को ले जाया जा रहा था, तब इसाबेला ने कहा ''मूर्ख ढ़ोंगी, तूने इतना झूठ बोला है कि तू नर्क में सड़ेगा।'' इस पर संत को हंसी आ गई। उसने आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा - ''वहां से मैं अकेला ही ऐसी मौत लिखवाकर नहीं लाया। पहले भी भले लोग ऐसे मारे गए और आने वाले वक्त में भी मारे जाते रहेंगे। मगर ऐसा हर व्यक्ति स्वर्ग जायेगा, जबकि तुम और तुम्हारे परिवार के लोग केवल नर्क में ही जा सकते हैं।'' ब्रेहन के संत के इसाबेला के परिवार के बारे में जो कहा था वह 1794 में जन्में अर्ल फ्रांसिस हंबरटन मैकेंजी के साथ पूरा उतरा। 12 वर्ष की उम्र में एक हादसे में वह गूंगा-बहरा हो गया। उसके चार बेटे थे, जो उसके सामने ही मर गये। 11 जनवरी, 1815 को हंबर स्टन भी मर गया। उसकी जायदाद एक अजनबी को मिली और धीरे-धीरे सब समाप्त हो गया।


कैग्ली ओस्ट्रो : भविष्यवेत्ता या मक्कारों का बादशाह

कैग्ली ओस्ट्रो का असली नाम जिसेप बाल्समो था। उसका जन्म सिसली के पास पेलेर्मो नामक स्थान में 8 जून, 1743 में हुआ था। उसका पिता एक यहूदी व्यापारी था, जो कंगाली के दिन न झेल पाने के कारण अनाथ जिसेप की सड़क पर छोड़ गया था। चर्च के एक पादरी ने उसे पढ़ाने-लिखाने के साथ-साथ जड़ी-बूटियों से तरह-तरह के नुक्से तैयार करने में माहिर भी बना दिया। मगर शरारतों के कारण जिसेप को चर्च से भगा दिया। उसने अपने एक मामा के यहां शरण ली। वहां उसने ड्राइंग बनाने में विशेषता हासिल की, परन्तु इस कला का भी उसने बाद में गलत ही इस्तेमाल किया। कुछ गलत दोस्तों की सोहबत में पड़कर जिसेप जादू-टोना सीखने की फिराक में इधर-उधर भटकता रहा और उसने छिटपुट भविष्यवाणियां करना सीख लिया। सन् 1768 में उसने रोम में एक असाधारण सुन्दरी लोरैंजा से विवाह कर लिया। लोगों को झांसा देकर, झूठी भविष्यवाणियां करके, उधार लेकर फरार होकर तथा मुकद्दमें बाजी के पचड़ों में बदनाम होकर जिसेप अपनी खूबसूरत परी के साथ जर्मनी चला गया और वहां से जब लन्दन आया तो अपना नाम व वेषभूषा बदल चुका था। अब सन् 1776 में वह मर्चीज पैलीग्रिनी था और लोरैंजा हो चुकी थी सेराफिना। इसके बाद उसने सट्टेबाजों को नम्बर बताना शुरू कर दिये। पता नहीं उसने यह कला सीखी कहां से। मगर उसके बताये नम्बरों पर जब रुपया बरसने लगा तो उसकी साख ऊंची हो गई थी। सौभाग्यशाली नम्बरों की तलाश में लोग उसकी पत्नि सेराफिना को रिश्वत तक देने से नहीं हिचकते थे। कहीं से उसे मिस्र की एक प्राचीन पुस्तक मिल गई और उसने बच्चों के माध्यम से जनता को मूर्ख बनाना शुरू कर दिया। भविष्यवाणी सही हो जाती तो उसका नाम होता था वरना गलती होने पर बच्चों के बचपने पर थोपा जाता था। कुछ समय बाद उसने यह नाम भी बदल दिया और वह काउंट कैग्लीओस्ट्रो के नाम से अपना धंधा करने लगा। अब उसने मेहनत करना शुरू कर दी। न्यूरैम्बर्ग में अपने भ्रमण के दौरान कैग्लीओस्ट्रो ने एक प्रभावशाली व्यक्ति साइफोर्ट के मरने की भविष्यवाणी कर तहलका मचा दिया। फिर वाकई एक माह के भीतर वह मर गया, तो लोगों ने उसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। कैग्लीओस्ट्रो के जीवन का यह भाग काले जादू और तांत्रिक अनुष्ठानों की सफलताओं का दौर रहा। जब कैग्लीओस्ट्रो पोलैण्ड चला गया। तब पहली बार उसने भरे दरबार में एक भविष्यवाणी करके सबको अचम्भित कर दिया। संयोग से उसके वारसा प्रवास के दौरान ही वह भविष्यवाणी सही भी हो गई। सम्राट स्टानिस्लास आगस्टस भविष्यवाणियों और तंत्र-मंत्र में बेहद रूचि रखते थे और इसी कारण वह कैग्लीओस्ट्रो को सर्वाधिक महत्व देने लगे थे। इससे चिढ़कर दरबार में शाही परिवार की एक महिला ने कहा कि अगर कैग्लीओस्ट्रो कुछ जानता है तो बताये इस माह उसके साथ क्या होने वाला है? इस पर कैग्लीओस्ट्रो ने बताया ''मैं जानता हूूं कि इसी महीने आप एक सफर पर जायेंगी। रास्ते में आपकी घोड़ा गाड़ी के साथ मामूली दुर्घटना होगी। जब आप दूसरे साधन के इंतजार में होंगी, तब तमाशबीन आपको सेव फेंककर चोट पहुंचायेंगे। वहां से आप तालाब के पास अपने कपड़े तथा हाथ-पैर साफ करने जायेंगी तो एक पुरुष से आपकी मुलाकात होगी, जिससे तमाम दिक्कतों के बावजूद आपकी शादी हो जायेगी। इस घटना के सही होने के बाद भी उसे पौलेण्ड से निकाल दिया गया, क्योंकि जब उसने राजकुमार पोनीन्स्की को पारस पत्थर का फर्जी चमत्कार दिखाकर ठगना चाहा। उसने हंगरी और बोहेमिया की सम्राज्ञी की सन् 1780 में मौत की भविष्यवाणी की, जो सही हुई। एकाध सफलता से कैग्लीओस्ट्रो भटक जाता था, वही हुआ। सन् 1785 में उसने प्रेतात्माओं का आव्हान करना तथा तंत्र-मंत्र का प्रदर्शन शुरू कर दिया। एक मौके पर उसने एक साथ 13 प्रेतात्माओं को बुला लिया, ऐसा ब्यौरा मिलता है। पेरिस आने पर कैग्लीओस्ट्रो को फिर भविष्यवाणी करने का दौरा पड़ा, उसने फ्रांस के सम्राट लुई पन्द्रहवे, सम्राज्ञी और रखैल डुबैरी की गर्दनें काटे जाने की बात कर सबको दहला दिया था और ये भविष्यवाणियां सही भी हुई। यहीं उसने नेपोलियन बोनापार्ट के उत्थान-पतन की सही भविष्यवाणियां कीं। फ्रांसीसी, जनरल ला मार्लीएरे पर मुकद्दमा चलाया जा रहा था, उन्हें बेहद बेचैनी थी, कैग्लीओस्ट्रो से पुछवाया तो जवाब मिला - जनरल को प्राणदण्ड मिलेगा और यह भविष्यवाणी भी सत्य साबित हुई।  कैग्लीओस्ट्रो पर भूत-प्रेत सिद्ध करने का शौक चर्राया। वैसे तो अपनी भविष्यवाणियां भी वह एक माध्यम के जरिये करता था। मगर चोर चोरी से जाये, हेराफेरी से न जाये। फलस्वरूप उस पर महल से सम्राज्ञी के हीरे जड़ा हार चुराने का आरोप लगा और उसे फ्रांस से निकाल दिया। उसकी सबसे मशहूर भविष्यवाणी 14 दिसम्बर 1789 को लुई सोलहवें के पतन को लेकर थी। जब वह भविष्यवाणी 5 अक्टूबर 1789 को पूरी होनी शुरू हो गई तो चारों ओर कैग्लीओस्ट्रो की शोहरत के झण्डे गड़ गये। कुछ समय बाद विद्रोह थमा तो कैग्लीओस्ट्रो पर अनेक आरोप लगाकर उसे पत्नी सेराफिना सहित कैद में डाल दिया गया। अदालत ने उसे मृत्युदण्ड दिया परन्तु पोप ने इस सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। 26 अगस्त, 1795 को वह मरा पाया गया, उसकी बीबी एक साल बाद मर गई। जब 1797 में क्रांन्तिकारियों ने शहर पर कब्जा कर लिया तो सबसे पहिले कैग्लीओस्ट्रो के बारे में पूछा गया। अगर वह जीवित होता तो क्रांतिकारी उसे सम्मानित करते क्योंकि उसने क्रांति की कामयाबी की भविष्यवाणी बहुत पहले कर दी थी।

जोअन्ना : स्वयंभू पैगम्बर: स्वर्ग जाने का परमिट
जोअन्ना का जन्म 1750 में इग्लैण्ड के डेवनशायर प्रान्त के गिटीशैम नामक स्थान में हुआ था, जोअन्ना शुरू से ही पूजा-पाठ तथा निहायत धार्मिक वृत्तियों की लड़की थी। सन् 1809 में इग्लैण्ड के यार्क क्षेत्र की एक घटना की बदौलत पहली बार पता चला कि जोअन्ना साउथकॉट नाम की एक स्वयंभू पैगम्बर लोगों को स्वर्ग जाने के परमिट जारी कर रही थी। दरअसल जोअन्ना शहर में एक अच्छे भविष्यवक्ता के रूप में प्रसिद्ध थी। अफसर हैरान थे कि अच्छा खासा भविष्य बताने का काम छोड़कर आखिर उसने लोगों को स्वर्ग भेजने की आढ़त का यह अजीबो-गरीब धन्धा शुरू क्यों कर दिया? जोअन्ना से सम्पर्क करने जब मजिस्ट्रेट के साथ कुछ सिपाही गये तो वह बेहद रूतबे के साथ उठी और मजिस्टेऊट फिलिप स्कॉट के सामने जाकर बोली ''जाओ अपने घर जाओ! वहां तुम अपनी तिजोरी खुली छोड़ आए हो। यदि तुम फौरन वहां नहीं पहुंचे तो तुम्हारे जरूरी कागजों के साथ सारा सामान चोरी हो जायेगा। तुम्हारे कमरे की खिड़की भी खुली है, उसमें सलाखें हैं नहीं तथा वह सड़क के पास है।''मजिस्ट्रेट साहब ताबड़तोड़ वापिस भागे और थोड़ी देर बाद ही वापस आकर जोअन्ना से कहने लगे, ''आप महान् हैं, मगर मुझे अपना कत्र्तव्य पालन तो करना ही होगा।''जोअन्ना पर कोई असर नहीं पड़ा। वह बोली, ''आप अपना काम करिये, मैं आपना काम करती रहूंगी। मुझे भविष्यवाणी करने तथा समाजसेवा करने के पवित्र काम से कोई नहीं रोक सकेगा।'' सन् 1793 में जोअन्ना की 46 भविष्यवाणियां सही उतरी, जिनसे उसकी शोहरत के झण्डे यूरोप के अलावा जापान तथा रूस तक गड़ गये। सन् 1801 में उसने अपनी भविष्यवाणियों की किताब ''विश्वास के विचित्र प्रभाव'' (The Strange Effects of faith) प्रकाशित कराई। किताब क्या थी? तहलका थी। मगर इसका एक खराब असर हुआ। अपनी कामयाबी से जोअन्ना बौखला गईं। सन् 1802 में वह इग्लैण्ड में आकर बस गईं। सही मायनों में यहीं आकर उसने अपनी प्रतिभा का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। स्वर्ग जाने के परमिट जारी करने के कारण वह विवादों का केन्द्र बन गईं। सन् 1805 तक इस प्रकार के 10,000 परमिट जारी हो चुके थे, जोअन्ना के विरोधियों ने जब उसके विरूद्ध सरकार पर दबाव डाला तो सरकार हरकत में आयी। जांच पड़ताल शुरू की, मगर जांच अधिकारी को वह अपना भक्त बना लेती थी। सन् 1810 में जोअन्ना ने साउथकॉट सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए विशेष पूजा गृह बनवाने शुरू किये गये। करीब 17 पूजा गृह न केवल आज तक विद्यमान हैं अपितु सक्रिय भी। 64 वर्ष की आयु में जोअन्ना ने भविष्यवाणी की कि अगले साल उसके गर्भ से संसार को नई राह दिखाने वाला मसीहा-शिलोह पैदा होगा। जोअन्ना की पुस्तक ''अचम्भों की तीसरी किताब'' (Third Book of Wonders) में नये मसीहा के बारे में काफी कुछ बताया गया था। 17 मार्च, 1814 को अचानक ही जोअन्ना बीमार पड़ गई। माने हुए डाक्टरों ने उसकी जांच की तो पाया, इतनी बूढ़ी होते हुए भी वह शारीरिक रूप से पूर्ण युवती लगती है और उसे चार माह का गर्भ था, परन्तु मसीहा कभी नहीं जन्मा। रहस्य के कोहरे में लिपटी जोअन्ना की हालत दिन-ब-दिन खराब होती गई। बेशुमार अनुयायी नये मसीहा के आने की तैयारियों में जुटे छोड़कर 27 दिसम्बर, 1814 को जोअन्ना संसार से कंूच कर गई। अपने मित्र और विख्यात डाक्टर रिचर्ड रीस को जोअन्ना ने हिदायत दी थी कि उसकी मौत के चार दिन बाद ही उसके शरीर की चीरफाड़ की जाए। उसकी इच्छानुसार उसके शरीर को चीरकर देखा तो डाक्टर भी चकरा गये कि चार माह के गर्भ के सारे लक्षण होने के बावजूद जोअन्ना का गर्भ था ही नहीं। दरअसल, यह उसकी परामानसिक इच्छाशक्ति का चमत्कार था। उसके अनुयायियों ने उसे रीजेन्ट्स पार्क स्थित सैंट जोन्स बुड सिमेटरी में दफना दिया। उसकी कब्र पर लगे पत्थर पर खुदा था, ''और अधिक शक्तिशाली बनकर तेरा अवतरण होगा।'' सन् 1974 में अचानक रीजेन्ट्स पार्क में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ। इबारत खुदा पत्थर टुकड़े-टुकड़े हो गया। फिर भी उसके अनुयायियों को आशा है - आज नहीं तो कल जोअन्ना आयेंगी। हां, विस्फोट का रहस्य अभी तक बना हुआ है।

भविष्यदृष्टाओं की सम्राज्ञी: मैरी लेनोर्मा

27 मई, 1772 को फ्रांस के अलेकॉन प्रान्त में जन्मी लेनोर्मा के पिता सम्राट लुई-पन्द्रहवें के चहेते दरबारियों में से एक थे और मां अनिद्य सुन्दरी थी। पिता की अल्पायु में मृत्यु होने के बाद उसने सौतेले पिता का प्यार कुछ समय तक पाया और फिर मां के मर जाने के बाद वह बिल्कुल अनाथ हो गयी। सौतेले पिता ने एक और शादी कर ली और फिर लेनोर्मा का उस घर से रिश्ता ही टूट गया। सात वर्ष की उम्र में उसे बेनेडिक्टाइन कान्वेंट में पढऩे भेजा गया। तभी उसके सहपाठियों तथा शिक्षकों को पता चला कि नन्हीं लेनार्मा में भविष्य पढऩे की विचित्र ताकत है। वह बता देती थी किस दिन बारिश होगी? कीचड़ में कौन गिरेगा? किसकी तबियत खराब होगी? किस बच्चे का सामान खो जायेगा? और वह सामान किसके पास मिलेगा? इम्तिहान में क्या पूछा जायेगा? उस दौर में ईसाई विश्वास के अनुसार ऐसी शक्ति सिर्फ शैतान के इशारे पर मिल सकती थी। इसलिए नन्हीं लेनोर्मा को शुद्ध करने के लिए उसे सूखी डबलरोटी का टुकड़ा व पानी दिया जाता था। मगर चर्च में कोई न कोई ऐसा जरूर होता था, जिसे भविष्य जानने की चिन्ता रहती थी। इसलिए लेनोर्मा की फ्राक की जेबें हमेशा काजू, बादाम, अखरोट की गिरियों से भरी रहती थी। सिर्फ 11 वर्ष की अल्पायु में उसने एक ऐसा कारनामा किया, जिसकी वजह से उसकी धाक जम गई। बेनेडिक्टाइन कान्वेंट में 'मदर' की जगह खाली थी। कान्वेंट की महिलाओं द्वारा अनुमान व दावे किये जा रहे थे कि अमुक को मदर नियक्त किया जावेगा। लेनोर्मा वहीं पर अपना पाठ सुनाने के चक्कर में घूम रही थी? उन लोगों की बातें सुनकर लेनोर्मा ने कहा कि आप सभी के अनुमान गलत होंगे, क्योंकि सम्राट खुद अपना उम्मीदवार कहीं दूसरी जगह से लाकर बैठा देंगे और वैसा ही हुआ। लेनोर्मा को उच्च शिक्षा के लिए एक स्कूल से दूसरे स्कूल भेजा जाता रहा। शिक्षा के स्तर पर भी उसने यह साबित कर दिया कि वह एक असाधारण प्रतिभा सम्पन्न छात्रा है। कुछ समय बाद लेनोर्मा ने अपने एक मित्र फ्लेमरमोंट के साथ अपना ज्योतिष कार्यालय खोला, पेरिस में। यहां एक भूमिगत कमरे में लोगों को भाग्य बताया जाता था। प्रत्यक्ष में वह पुस्तकें बेचने का कारोबार करती थी लेकिन उसका असली काम तो भविष्य दर्शन था। उसकी दूकान में बने तहखाने में किताब खरीदने के बहाने ग्राहक नीचे आते थे और अपना भविष्य बंचवाकर पीछे के रास्ते से निकल जाते थे। पुलिस और कानून दोनों की नजर लेनोर्मा पर थी, मगर उन्हीं में ऐसे भी थे, जिन्होंने उसे सुरक्षा का पूर्ण वचन दे रखा था। फ्रांस की कई मशहूर हस्तियों के बारे में उसने महत्वपूर्ण भविष्यवाणियां कीं। जैसे राजकुमारी डी लैंबाल भयानक मौत मरेगी, लजार हाश नामक एक व्यक्ति महान् जनरल बनेगा, मगर वह 30 वर्ष की उम्र तक जी पायेगा। फ्रांस के तीन महान् क्रांतिकारी अप्राकृतिक मौत मरेंगे, जिनके नाम मरात, सैंट जस्ट और रोबेसपियरे होंगे। फ्रांसीसी सम्राट के दरबारी रंगमंच का डायरेक्टर मौते जियर क्रांतिकारियों द्वारा पकड़े जाने के पूर्व लेनोर्मा के पास आया था। उस औरत ने मुझे गौर से देखा और कहा तुम पकड़े जाओगे, काफी चोटें आयेंगी। मगर वहीं चोटें तुम्हें मृत्यु से बचायेगी। तुम बहुत जियोगे और नाम कमाओगे। मोंतेजियर पकड़ा गया, जल्लाद के द्वारा सिर कटवाने से भी बचा, नये सम्राट ने जीवनदान दे दिया और वह लम्बी आयु तक जिया एवं नाम भी खूब कमाया तथा सारी उम्र लेनोर्मा का गुण गाता रहा। नेपोलियन बोनापार्ट सन् 1793 में लेनोर्मा के पास आया, तब वह फ्रांस की फौज की नौकरी से निराश हो चुका था। फ्रांस में उसका भविष्य क्या होगा? क्या उसे टर्की जाने का पासपोर्ट मिल सकेगा? ये सवाल पूछने के बाद वह भौचक्का रह गया, जब लेनोर्मा ने उससे कहा ''जाने की जल्दी क्या है? तुम तो फ्रांस के निर्माता बनने के लिए पैदा हुए हो, तुम्हें हुकुमत करनी है। तुम सम्राट बनोगे। इस देश से तुम जाओगे तो नयी विजयश्री पाने को जाओगे। उसने एक और भविष्यवाणी की थी। एक विधवा तुम्हें खुशहाल और प्रभावशाली बनायेगी, मगर तुम उसके साथ बेवफाई मत करना अन्यथा तुम दोनों का सर्वनाश हो जायेगा।  लेनोर्मा की भविष्यवाणी सत्य हुई। नेपोलियन बोनापार्ट यूरोप का सम्राट बना। सैन्य अधिकारी की विधवा जोसेफीन से शादी की। किन्तु 1809 में उसके संबंध जोसेफीन से बिगडऩे लगे। इसके बाद उसने जोसेफीन से तलाक ले लिया। नेपोलियन बोनापार्ट के विषय में जनवरी 1810 में लेनोर्मा ने भविष्यवाणी की ''वह जो बना है सिपाही से सम्राट, सन् 1814 में उसकी हुकुमत मिट जायेगी और वह एक द्वीप में कैदी बनकर रह जायेगा। भविष्यवाणी सही निकली। वाटरलू के मैदान में नेपालियन बोनापार्ट युद्ध में पराजित हुआ तथा एल्वा द्वीप पर मृत्युपर्यन्त कैद रहा। इससे लेनोर्मा की ख्याति बढऩा ही थी क्योंकि उसकी भविष्यवाणी अक्षरस सही साबित हुआ। सर्वज्ञाता भविष्यवक्ता लेनोर्मा 25 जून, 1843 में 71 वर्ष की उम्र में ही चल बसी। उसने विभिन्न विषयों पर 34 ग्रंथ लिखे। एक आलोचक ने उसकी मौत पर लिखा - ''वह महान थी और महान भविष्यवक्ता थी। एक अन्य रोचक घटना - सन् 1804 में एक पेंटर स्वीडन से पेरिस कुछ खरीददारी करने आया। उत्सुकतावश लेनोर्मा के पास अपना भाग्य जानने गया। लेनोर्मा ने कहा ''अगर मैं यह कहूं कि तुम्हारे बारे में, मैं जो भविष्यवाणी करने जा रही हॅू उसकी कीमत 10,000 फ्रांक (थ्तंदब) है तो क्या हाथ दिखाओगे?'' पेन्टर सकपका गया और बोला - अगर मेरे पास इतना धन आया तो जरूर दूंगा। तो सुनो होने वाले सम्राट, तुम दो देशों के राजा बनोगे और लगभग 25 साल तक शासन करोगे।'' लेनोर्मा ने गम्भीरता से कहा। तुम पेन्टर नहीं हो, तुम कोई फौजी अफसर हो।  वह पेन्टर था बर्नादो (Bernadotte) जो नेपोलियन की फौज में मार्शल था। सन् 1818 में वह स्वीडन और नार्वे का सम्राट बना। उसने 1844 तक लगातार शासन किया। मरते समय उसकी अपनी वसीयत में लेनोर्मा को 10,000 फ्रांक देने का निर्देश था।





- पंडित पी एन भट्ट
अंतरराष्ट्रीय ज्योतिर्विद,
अंकशास्त्री एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ
संचालक : एस्ट्रो रिसर्च सेंटर
जी-4/4,जीएडी कॉलोनी, गोपालगंज, सागर (मप्र)
मोबाइल : 09407266609
फोन : 07582-227159, 07582-223168



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें