रविवार, 19 जुलाई 2015

शार्ट फिल्मों का जादूगर - रतीराम कैमया


राजधानी में 1988 से अब तक बना चुके हैं कई फिल्में

- राजकुमार सोनी



 भोपाल। राजधानी में जहां बड़े-बड़े नामी-गिरामी फिल्म निर्माता व डायरेक्टर कई फिल्मों व सीरियल की शूटिंग कर रहे हैं वहीं साधारण परिवार में जन्म लेने सामान्य कद-काठी सा दिखने वाले इस इंसान को देखकर ऐसा नहीं लगता कि राजधानी में दर्जनों शॉर्ट फिल्में, भोजपुरी व हिन्दी फिल्में बनाई होंगी। ऐसे शख्स का नाम है - रतीराम कैमया। रतिराम कैमया अपने खुद के प्रॉडक्शन हाउस 'कृष्णा ओ कृष्णा आर्टसÓ के बैनर तले फिल्में, सीरियल बनाते हैं जो प्रदेश से लेकर बॉडीवुड तक चर्चाओं में हैं।

1988 से आए फिल्मों में
कैमया ने अभिनय की दुनिया में 1988 से कदम रखा। उन्होंने पहली फिल्म 'असली एनकाउंटरÓ में बतौर एक्टर काम किया। यह फिल्म निर्माता सुरजीत सबरवाल द्वारा डीबीसी फिल्म के बैनर तले बनी थी। बाद में रतिराम ने सुरजीत सबरवाल से स्क्रीन राइटिंग, प्ले निर्देशन व एक्टिंग का काम सीखा। बाद में 1993 में मप्र की टीम को लेकर कृष्णा ओ कृष्णा (फिल्म) आटर्स नामक संस्था का गठन किया। 1994 में इसी बैनर तले पहली पहली फिल्म 'आभासÓ का निर्माण किया जो 25 मिनट की थी। फिल्म का निर्देशन रामप्रसाद शर्मा ने किया। जबकि मुख्य कलाकार राजेंद्र श्रीवास्तव, अभिनेत्री अनीजा केशवान, पिता की भूमिका रतिराम कैमया ने निभाई। इसमें लगभग आधा दर्जन स्थानीय कलाकारों ने भूमिका निभाई।

भोजपुरी लोकगीतों की ओर रुख
रतिराम कैमया ने 2006-7 में भोजपुरी लोकगीतों की तरफ रुख किया जिसमें पहला एलबम 'उड़ल गोरी के लहंगाÓ बाजार में आया। इसमें सह निर्देशक व कलाकार के रूप में साधू , फकीर व एक किसान की भूमिका का अभिनय किया गया। 2007-08 में 'कॉलेज जा ली गोरियाÓ में डॉक्टर व डाकिया की भूमिका निभाई। इसी तरह 2008-09 में तीसरा एलबम 'हाजीपुर के केराÓ व 2009-10 में 'आवा भौजी डालब तह पे रंगÓ आया। यह एलबम होली के 8 गानों पर आधारित है। दोनों एलबम के गायक व संगीतकार मोहम्मद रहीमउद्दीन हैं। इसी कड़ी में 2011 में फिल्म फेस्टीवल हेतु 20 मिनट की हिन्दी फिल्म 'चाहते जोÓ भोपाल में निर्माण की गई, साथ ही 2012 में फिल्मी चक्कर 25 मिनट की फिल्म फेस्टीवल में दी गई। इन फिळ्मों को मप्र के फिल्म फेस्टीवल में अवार्ड से सम्मानित किया गया।  वर्ष 2014 में दो मिनट की डंकिंग ड्राइव पर एक एड फिल्म का निर्माण किया गया जो प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए भेजी गई है।

शीघ्र आएगा एलबम
कृष्णा ओ कृष्णा प्रॉडक्शन के बैनर तले शीघ्र ही पांचवां एलबम 'बेटी कैसे होई शादीÓ (सात भोजपुरी लोकगीत) आएगा। जिसकी शूटिंग भोपाल व आसपास के चुनिंदा इलाकों में होगी। इसके बाद दो घंटे की एक फिल्म 'अभी प्यार बाकी हैÓ (लव स्टोरी व मारधाड़) पर आधारित है का निर्माण 2016 में किया जाएगा। इसके लिए हीरो-हीरोइन की तलाश की जा रही है।

शार्ट फिल्मों की मांग ज्यादा
बाडीवुड-हॉलीवुड में अब शार्ट फिल्मों की डिमांड ज्यादा होने लगी है। सोशल मीडिया के तहत फेसबुक, यू-ट्यूब, पिकासा, ट्यीटर आदि साइटों पर प्रचलन तेजी से बढऩे से हर कोई इसी पर लाइक कर रहा है। कैमया ने बताया कि शार्ट फिल्में 2 से 15 मिनट तक की बनाई जा रही हैं जो सामाजिक बुराइयों, रूढि़वादी परंपराओं, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, समाज में बदलाव लाने व गरीबी, नशा से मुक्ति दिलाने जैसे विषयों को प्राथमिकता से लिया जा जाता है। हर बेटा-बेटी शिक्षित होकर आगे बढ़े ऐसी शार्ट फिल्मों को खूब पसंद किया जा रहा है।

Ratiram kemya

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